दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस

 दुनिया के 10 सबसे खतरनाक वायरस


हाय फ्रेंड्स, आज के हमारे इस टॉप 10 में हम आपको दुनिया के मोस्ट डेंजरस वायरस के बारे में बताने वाले है।  जैसे कि आपको पता है कि किसी भी वायरस का वायरल बोहोत जल्दी हो जाता है। ज्यादा तर ये हवा में या वायरल इंसान को छूने से ज्यादा फैलता है। कोई भी वायरस काफी खतरनाक हो सकता है। इसलिए दोस्तो हमे अपना ध्यान रखना है। ये 10 वायरस काफी खतरनाक है इतने की इसमे इंसान की जान भी जा सकती है। अगर इसे हमने इग्नोर किया तो। इसलिए दोस्तो हमे ज्यादा स ज्यादा खयाल रखना है की अपने हाथों को हमेशा क्लीन रखो। चलो तो दोस्तो जानते है ये टॉप 10 वायरस कोनसे है।

 

मारबर्ग

मारबर्ग ये वायरस काफी खतरनाक है। ये वायरस एक रक्तस्रावी बुखारी वायरस है। इबोली की तरह मारबर्ग त्वचा और अंगों के आक्षेप और रक्तस्राव का कारण बनता है। इस वायरस में 90 प्रतिशत लोगो की मृत्यु हो जाती है। ये बोहोत जल्दी वायरल हो जाता है। इसका नाम लाहन नदी के एक छोटे शहर पर रख गया था। लेकिन इसका इस वायरस से कोई लेना देना नही है।

 

इबोला

एबोला ये सबसे घातक वायरस है। जिसकी मृत्यु 90 प्रतिशत होती है। वैज्ञानिकों का ये कहना है कि फ्लाइंग फॉक्स शहर में एबोला वायरस लाये है। ये वर्तमान में गिनी लिबेरिया के आगे तक फैला हुआ था। ये वाइरस काफी जानलेवा भी है। इस वायरस के 5 उपभेद है। इसके नाम अफ्रीका और देशो के क्षेत्र के नाम पर रख गया है।

 

हंटावायरस

हंटावायरस का नाम एक नदी के नाम पर रखा गया है। अमेरिकी सैनिको ने 1950 में कोरियाई युद्ध के दौरान इस हंटावायरस को संक्रमित होने के बारे में सोचा था। इसके लक्षणों में फेफड़े की बीमारी, बुखार और घुटनों का दर्द शामिल है। इसमें कही ज्यादा लोगो की मृत्यु भी हो चुकी है।

 

बर्डफ्लू

बर्डफ्लू में एक अनियमित रूप से घबराहट होती है। इस वायरस के कही सारे प्रकार भी हैं। इसमे 70 प्रतिशत मृत्यु होती है। लेकिन वास्तव में H5N1 तनाव को अनुबंधित करने का जोखिम - सबसे अच्छा ज्ञात में से एक - काफी कम है।  आप इसे अक्सर ज्यादा ऐशियाई में पाया जाता है क्यों कि इस ईस के लोग मुर्गी के पास ही रहते है।

 

लसा

लसा वायरस से नाइजीरिया की एक नर्स संक्रमित होने वाली पहली व्यक्ति थी। पश्चिमी अफ्रीका में, और किसी भी समय वहां फिर से मिल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि पश्चिमी अफ्रीका में 15 प्रतिशत कृन्तकों में वायरस होता है। इसमे 80 प्रतिशत लोगो के मृत्यु का कारण ही ये लसा वायरस है। ये वायरस कृन्तको द्वारा प्रेषित होता है।

 

जूनिन

इस वायरस से ऊतक सूजन त्वचा से खून बहने की समस्या होती है। इस वायरस के लक्षण इतने आसानी से ध्यान में आते है की पहली बार देखने के बाद ही इस बीमारी का पता लग जाता है। जूनिन वायरस ज्यादा तर बुखार के साथ जुड़ा होता है।

 

क्रीमिया कांगो

क्रीमिया कांगो वायरस बुखार टीको द्वारा फैलता है। ये वायरस इबोला और मारबर्ग समान होता है। संक्रमण के पहले दिनों के दौरान, चेहरे, मुंह और ग्रसनी में पिन-आकार के रक्तस्राव के साथ मौजूद होता है। इस वायरस में 90 प्रतिशत लोगी में मृत्यु  होता है।

 

माचुपा वायरस

माचुपा वायरस रक्तस्रावी बुखार से जुड़ा है। इसे काले टैफल के रूप में भी जाना जाता है। इस वायरस से तेज बुखार होता है। ये वायरस जूनिन वायरस के समान है। ये वायरस एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य तक फैलता है। कृन्तक हमेशा इसे ले जाते है। इस वायरस की फैलने की आशंका ज्यादा होती है।

 

कयासनूर फॉरेस्ट

भारत मे वैज्ञानिकों ने 1955 में दक्षिण पश्चिमी तट पर वुडलैंडस में कयासनूर फॉरेस्ट वायरस की खोज की थी। इस वायरस से संक्रमित बुखार मासपेशियां में दर्द और सिरदर्द से पीड़ित होते है। यह माना जाता है कि चूहे, पक्षी और सूअर मेजबान हो सकते हैं।

 

डेंगू

डेंगू वायरस एक अलग ही खतरा वायरस है। ये मच्छरों द्वारा फैलता है। छुट्टी के दिनों में थाईलैंड और भारत जैसे देशों में ये 50 से 100 मिलियन लोगो को इस वायरस ने प्रभावित किया है। लेकिन यह उन 2 अरब लोगों के लिए एक समस्या है जो डेंगू बुखार के खतरे वाले क्षेत्रों में रहते हैं। मच्छर के काटने से ये डेंगू होता है।



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